माननीय प्रधानमंत्री मोदी जी ने आत्मनिर्भरता के पैमानों को लेकर राष्ट्र के नाम जो संबोधन दिया वह सुनकर शायद आपको ऐसा लगे कि कोई व्यक्ति स्वंय ही अपनी प्रशंसा कैसे कर सकता है जबकि हालात तो कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं।
मोदी जी कह रहे है कि आत्मनिर्भर बनिए लेकिन कैसे? पहले आप उत्पादन तो बढ़ाइए। अब आप पहले गुजरात के मुख्यमंत्री रहे है तो आपने कह दिया कि विकास किया जाए लेकिन जहां लोग तीन वक्त का खाना जुटाने में ही पूरा समय लगा देते है वो कैसे आविष्कारों और विनिर्माण पर ध्यान लगा पाएंगे। साथ ही आप शायद भूल रहे है कि अन्य राज्यों की तरह गुजरात एक विकसित राज्य है जहां चीजें और जगहों से कही अधिक विकसित है।
क्या आपने अहिंसा प्रिय महात्मा गांधी जी को नहीं पढ़ा है जिन्होंने कहा था कि विदेशी चीजों का बहिष्कार करो तभी खादी का विकास हो पाएगा, लेकिन आपने तो अधिकतर क्षेत्रों में एफडीआई 100 प्रतिशत लागू कर दिया है। सोने पर सुहागा की बात यह है कि मोदी जी ने हमें और विश्व को यह सौगात दी और यह उपहार दिया जबकि जो मज़दूरों पैदल चल रहे है, भूखे मर रहे है, अपनी जान गंवा रहे है प्रधानमंत्री ने संबोधन में उनका ज़िक्र तक नही किया। शायद उन्हें उनका ख्याल तक न आया हो।
- राहुल कुमार
(संपादक- अंशिका जौहरी )



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