क्या है विश्व स्वास्थ्य सभा की बैठक जो कोरोना को ख़त्म करने के लिए शुरू हुई है



विश्व स्वास्थ्य सभा (WHA) वह मंच है जिसके माध्यम से विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) अपने 194 सदस्य देशों द्वारा शासित होता है. यह विश्व की सर्वोच्च स्वास्थ्य नीति सेटिंग बॉडी है और सदस्य राज्यों के स्वास्थ्य मंत्रियों से बना है. WHA के सदस्य आमतौर पर हर साल मई में जिनेवा में पैलेस ऑफ नेशन्स में मिलते हैं, जो WHO मुख्यालय का स्थान है. डब्ल्यूएचए के मुख्य कार्य प्रमुख नीतिगत प्रश्नों को तय करना है, साथ ही डब्ल्यूएचओ के कार्य कार्यक्रम और बजट को मंजूरी देना और इसके महानिदेशक का चुनाव करना है.

पहली विधानसभा 1948 में आयोजित किया गया था जिसमें 55 सदस्य राज्यों की संख्या मौजूद थी, WHA के पास वर्तमान में 194 सदस्य देश हैं. इस वर्ष WHA की 73 वीं विश्व स्वास्थ्य सभा है, जो कि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से, वस्तुतः 18 मई से शुरू हो कर 21 मई 2020 तक होगी. सोमवार 18 मई को, ऑस्ट्रेलिया और यूरोपीय संघ ने COVID-19 महामारी के "निष्पक्ष मूल्यांकन" का आह्वान किया कि कैसे इसका प्रकोप हुआ. इस प्रस्ताव को 120 से अधिक प्रतिनिधियों ने समर्थन दिया.

कोरोना पर इस विश्व स्वास्थ्य सभा की बैठक में भारत समेत विश्व के 120 से अधिक देशों ने समर्थन किया और ड्राफ्ट प्रस्ताव में कोरोना की कोरोना पर सही तरह से जांच की मांग की है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के डायरेक्टर जनरल ने चीन पर टिपण्णी करते हुए अपने कथन में कहा - "कोरोना को लेकर बहुत जल्दी आगाह कर दिया". इस बैठक में चीन के तरह से चीनी राष्ट्रपति शी जिनलिंग ने भी हिस्सा लिया, और अपने बचाव में जवाब दिया कि - "हमने कोरोना वायरस के जिनोम सीक्वेंस की जानकारी जल्दी ही दे दी थी." जिनपिंग ने यह भी कहा कि कोरोना वायरस सीमाओं को नहीं पहचानता. चीन ने ओरस्थाव दिया कि कोरोना को रोकने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन कोरोना के खिलाफ वैश्विक मुहिम यानी ग्लोबल कैंपेन का मुहिम करा जाए. जर्मनी ने कहा कि - हमे कोरोना से एकजुट हो कर लड़ना होगा, यह जंग हमे साथ जितनी है, और सबको साथ साथ चलना होगा.

कोरोना से लड़ने में विश्व स्वास्थ्य संगठन एक अहम भूमिका निभाता है. कोरोना से लड़ रहे सभी स्वास्थ्य करतायों के लिए तालियां बजा कर उनको सम्मानित किया गया. इस कठिन समय जो अपनी जान की परवाह किये बिना देश्वासियों के लिए 24 घण्टे खड़ा रहता है वह है हमारे स्वास्थ्य कर्मी है.

ताइवान के पर्यवेक्षण प्रस्ताव को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने टाल दिया. चीन ने भी ताइवान के पर्यवेक्षण प्रस्ताव के खिलाफ खड़ा था. विश्व स्वास्थ्य सभा की अब तक की पहली वीडियो सभा की शुरुआत में देशों ने ताईवान को पर्यवेक्षक पहुंच प्रदान करने के संबंध में निर्णय इस वर्ष के अंत तक टालने का सर्वसम्मति से निर्णय किया जिससे कोविड-19 महामारी पर से ध्यान भंग न हो. कोरोना पूरे विश्व पर कहर बन कर आया है, उससे लड़ना अधिक महत्वपूर्ण है. ताइवान विश्व स्वास्थ्य संगठन की तरफ से होने जा रही वर्ल्ड हेल्थ असेंबली में शामिल नहीं होने वाला है. ताइवान के विदेश मंत्री जोसेफ वू ने कहा कि - उनका देश डब्ल्यूएचए में हिस्सा नहीं लेगा लेकिन वह दूसरे देशों में चिकित्सा आपूर्ति जारी रखेगा और चीन के दोहरे व्यवहार का विरोध करेगा, जो इस तरह के मंचों से उसे दूर रखता.

संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा कि कोरोना से लड़ने लिए हमें और ज्यादा ग्लोबल यूनिटी की जरूरत है, इससे विकासशील देशों में और ज्यादा नुकसान होने की संभावना है. वहीं, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने कहा- हमने कोरोना महामारी से निपटने के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास किया. भारत ने हर आवश्यक कदम उठाया है, हम अभी भी सीख रहे हैं, और हमें भरोसा है कि हम आने वाले वक्त में और बेहतर करेंगे. यहीं चीन ने घोषणा की है कि अगर चीन में कोरोना का वैक्सीन तैयार होता है तो इसे वैश्विक तौर पर सार्वजनिक सामान घोषित किया जाएगा.

इस बैठक के दो दिन बाद 22 मई काे डब्ल्यूएचओ के एग्जीक्यूटिव बोर्ड की बैठक होगी, जिसमें भारत को डब्ल्यूएचओ के फैसले पर निर्णय लेने वाले बोर्ड का प्रमुख बनाया जाएगा.

- अनुकृति प्रिया

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