आप सभी ने ही हमारे भारत और नेपाल की दोस्ती के कई किस्से सुने होंगे. आम तौर पर माना जाता है कि भारत और नेपाल घनिष्ठ मित्र हैं और दोनों देशों की ये मित्रता हजारों वर्ष पुरानी है, जिसके केंद्र में संस्कृति और धर्म है. नेपाल वर्षों तक दुनिया का अकेला ऐसा देश था जो हिंदू राष्ट्र था. इसके अलावा रामायण और महात्मा बुद्ध के जीवन में भी नेपाल की भी भूमिका रही है. लेकिन इन दिनों एक सीमा विवाद को लेकर यह दोस्ती खतरे में है. दरअसल विवाद यह है, कि नेपाल ने उत्तराखंड में स्थित तीन महत्वपूर्ण इलाकों पर अपना दावा जताया है और अपने नए राजनीतिक नक्शे में इन तीनों इलाकों को अपना हिस्सा बताया है. लिपुलेख, कालापानी और लिंपिया-धुरा, यह इन तीनो इलाके के नाम है.
मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली अपनी राजनीतिक जमीन पर एक बार फिर पकड़ मजबूत करना चाहते हैं और यही कारण है कि उन्होंने देश की जनता के सामने राष्ट्रवाद का मुद्दा उठाया है.
मंगलवार को संसद को संबोधित करते हुए ओली ने यह कहा था कि यह क्षेत्र नेपाल के हैं, लेकिन भारत ने अपनी सेना को वहां रखकर विवादित क्षेत्र बना दिया है. ओली ने कहा कि भारत की सेना के तैनात होने के बाद नेपालियों को वहां जाने से रोक दिया गया था. ओली की अध्यक्षता में सोमवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में कालापानी, लिपुलेख और लिंपियाधुरा को नेपाल के क्षेत्रों के रूप में शामिल करने के नए नक्शे का समर्थन किया गया है. ओली ने कहा कि नए नक्शे को संविधान और राज्य चिन्ह में अद्यतन किया गया है और जल्द ही इसे सरकारी कार्यालयों में रखा जाएगा, इसे आवश्यक संविधान संशोधन के लिए संसद में पेश किया जाएगा. नेपाल सरकार की भूमि व्यवस्था सहकारी एवं गरीबी निवारण मंत्री पद्मा अर्याल ने अपने मंत्रालय में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में नए नक्शे का अनावरण किया और उन्होंने कहा कि नेपाल को विश्वास है कि इस नए नक्शे पर भारत का रुख सकारात्मक होगा.
- अनुकृति प्रिया


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