- स्पेशल रिपोर्ट
लॉकडाउन के दौरान प्रवासी मज़दूरों को घर वापस जाने का इंतज़ाम कराने के लिए केंद्र सरकार ने मज़दूर दिवस (1 मई) से 'श्रमिक स्पेशल' एक्सप्रेस चलाने का निर्देश दिया. सबसे पहले झारखंड सरकार ने हटिया तक अपने प्रवासी मज़दूरों को वापस बुला लिया.
लेकिन इसी दौरान ये बहस होनी लगी कि मज़दूरों से रेल किराया वसूला जा रह है. वरिष्ठ पत्रकार पुण्य प्रसून वाजपेयी ने एक तस्वीर ट्वीट करते हुए जानकारी दी कि मज़दूरों से अधिक किराया वसूल किया जा रहा है.
लेकिन इस दावे के उलट भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि रेल मंत्रालय किराये का 85% दे रही और 15% राज्य सरकारों से लिया जा रहा है. लेकिन अभी तक रेल मंत्रालय ने कोई भी सरकारी नोटिफिकेशन जारी करके ये जानकारी नहीं दी है. इसी बीच कई मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मज़दूरों से रेल किराया वसूला जा रहा है. बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार कई जगहों पर मज़दूरों से 800 रुपए तक भी लिए गए हैं.
जब कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने मज़दूरों का किराया देने की पेशकश की तब भाजपा के नेताओं की ओर से लगातार स्पष्टीकरण दिया गया कि सरकार मज़दूरों का किराया दे रही है.
इसी बीच जब एक और ट्वीट सामने आता है जिसमें मज़दूर अपना किराया खुद ही दे रहे हैं.
अब ऐसे में सवाल ये उठता है कि सरकार इस पर क्या जवाब देगी.
(स्रोत- लाइव मिंट)
लॉकडाउन के दौरान प्रवासी मज़दूरों को घर वापस जाने का इंतज़ाम कराने के लिए केंद्र सरकार ने मज़दूर दिवस (1 मई) से 'श्रमिक स्पेशल' एक्सप्रेस चलाने का निर्देश दिया. सबसे पहले झारखंड सरकार ने हटिया तक अपने प्रवासी मज़दूरों को वापस बुला लिया.
लेकिन इसी दौरान ये बहस होनी लगी कि मज़दूरों से रेल किराया वसूला जा रह है. वरिष्ठ पत्रकार पुण्य प्रसून वाजपेयी ने एक तस्वीर ट्वीट करते हुए जानकारी दी कि मज़दूरों से अधिक किराया वसूल किया जा रहा है.
लेकिन इस दावे के उलट भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि रेल मंत्रालय किराये का 85% दे रही और 15% राज्य सरकारों से लिया जा रहा है. लेकिन अभी तक रेल मंत्रालय ने कोई भी सरकारी नोटिफिकेशन जारी करके ये जानकारी नहीं दी है. इसी बीच कई मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मज़दूरों से रेल किराया वसूला जा रहा है. बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार कई जगहों पर मज़दूरों से 800 रुपए तक भी लिए गए हैं.
जब कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने मज़दूरों का किराया देने की पेशकश की तब भाजपा के नेताओं की ओर से लगातार स्पष्टीकरण दिया गया कि सरकार मज़दूरों का किराया दे रही है.
इसी बीच जब एक और ट्वीट सामने आता है जिसमें मज़दूर अपना किराया खुद ही दे रहे हैं.
अब ऐसे में सवाल ये उठता है कि सरकार इस पर क्या जवाब देगी.

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