कोरोना की महामारी मज़दूरों पर भारी


कोरोना वायरस लॉकडाउन ने देश विदेश में सभी की बुरी हालत कर रखी है. पर सबसे ज़्यादा बुरा हाल मज़दूरों का है. मज़दूरों की दुर्दशा का एक नया मामला सामने आया है. एक रेलगाड़ी शुक्रवार को वापस अपने गृह राज्य की ओर जाने वाली रेल की पटरियों पर घूम रहे प्रवासी श्रमिकों के एक समूह में दुर्घटनाग्रस्त हो गई, जिसमें कम से कम 16 की मौत हो गई.

खबरों के अनुसार, फैक्टरी कारखाने के श्रमिकों का समूह जालना से मध्य प्रदेश में अपने घर रवाना होने के लिए पैदल चल रहा था. लगभग 36 किलोमीटर चलने के बाद, ये मज़दूर थका हुआ महसूस करने लगे और आराम करने के लिए कर्नाड और बदनापुर रेलवे स्टेशनों के बीच ट्रैक पर बैठ गए. वे थके होने के कारण गहरी नींद में चले गए. रेल मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि मालगाड़ी इन मजदूरों के पास सुबह 5:22 बजे पहुंची.


चालक ने ट्रेन को रोकने की कोशिश की, लेकिन समय रहते ऐसा नहीं कर सका.


इससे पहले 30 मार्च को कथित तौर पर लॉकडाउन के नियम तोड़ रोड पर आने के लिए 90 से अधिक प्रवासियों को गिरफ्तार किया गया था. उन्हें घर वापस भेजने की मांग की गई थी. उन श्रमिकों में से अधिकांश शहर के पावर लूम टेक्सटाइल कारखानों के कर्मचारी थे जो देशव्यापी लॉकडाउन के कारण बंद हो गए थे. लॉकडाउन के कारण मजदूरों को उनकी दिहाड़ी नहीं मिल रही थी.


हाल ही में मुंबई से यह घटना सामने आयी है. मुंबई के बांद्रा में एक रेलवे स्टेशन के बाहर लगभग 1000 बेरोज़गार प्रवासी मज़दूर प्रदर्शन करने के लिए इकट्ठा हुए. इनमें से ज़्यादातर मज़दूर उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के थे. मुंबई पुलिस ने विरोध प्रदर्शन करने वाले प्रवासी कामगारों पर लाठीचार्ज किया, जो दोपहर 3 बजे बांद्रा रेलवे स्टेशन के पास इकट्ठे हुए और दो घंटे बाद उन्हें छोड़ दिया गया.

केरल में एर्नाकुलम जिले के कूटट्टुकुलम क्षेत्र में पुलिस को अपने-अपने राज्यों में वापस भेजे जाने की मांग कर रहे प्रवासी मज़दूरों को एकत्रित ना रहने देने के लिए लाठीचार्ज का सहारा लेना पड़ा. पर खुशी कि बात यह है कि केरल सरकार ने प्रवासियों को उनके मूल स्थानों पर वापस भेजने के लिए विशेष व्यवस्था की है. पिछले कुछ दिनों में, प्रवासियों और फंसे लोगों को ले जाने वाली कई श्रमिक ट्रेनें केरल से देश के विभिन्न हिस्सों के लिए रवाना हो गई हैं.


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