- सृजन शुक्ला
दुनिया के सभी देश कोरोना वायरस महामारी को खत्म करने
की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं. कोरोना वायरस ट्रैक करने के लिए लगातार मोबाइल ऐप्स निकाले
जा रहे हैं. पूरे विश्व में 10 देशों की सरकारों द्वारा स्वीकृत ऐप्स लॉन्च किए जा
चुके हैं. इस कोशिश में भारत भी पीछे नहीं रहा है. हाल ही में, आरोग्य सेतु ऐप भारत
सरकार द्वारा आंशिक तौर पर अनिवार्य
कर दिया गया है. इन कोरोना ट्रैकिंग एप्स की मदद से सिंगापुर और दक्षिण कोरिया जैसे देशों में कोरोना का मृत्यु दर बहुत कम हुआ है.
आरोग्य सेतु ऐप का मुख्य उद्देश्य COVID-19 से संक्रमित
व्यक्तियों एवं उपायों से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराना होगा. यह ऐप लोगों को कोरोना
वायरस संक्रमण का आकलन करने में मदद करेगा. इस ऐप में ब्लूटूथ तकनीक, एल्गोरिदम
(Algorithm), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का प्रयोग किया गया है. आरोग्य सेतु ऐप हिंदी
और अंग्रेजी सहित 11 भाषाओं में उपलब्ध है.
एक तरफ जहां भारत सरकार इसे अनिवार्य करते हुए बढ़ावा
दे रही है वहीं दूसरी तरफ इस ऐप की निजता, गोपनीयता पर सवाल उठ रहे हैं. सरकार यह गारंटी
नहीं दे रही है कि मौजूदा हालत सुधारने के बाद यह सारा डाटा नष्ट कर दिया जाएगा. विशेषज्ञों
के अनुसार, क्या डाटा लिया जाएगा, उस डाटा का इस्तेमाल कहां होगा, क्या डाटा सरकार
द्वारा कब तक रखा जाएगा, इस पर सरकार ने अभी पर्याप्त जानकारी नहीं दी है.
इसी बीच एक फ्रांसीसी हैकर रॉबर्ट बैपसाइट का ट्वीट
आता है कि आरोग्य सेतु ऐप सुरक्षित नहीं है जिससे 9 करोड़ भारतीयों की निजता दांव पर
है.
हालांकि सरकार ने बयान जारी करते हुए कहा है कि किसी भी तरह का डाटा हैकिंग और किसी की भी निजी जानकारी नहीं ली जायेगी. लेकिन सरकार के दावे फीके लग रहे हैं. सरकार ने लिखा है कि सिर्फ तीन जगहों पर ही लोकेशन की जानकारी ली जा रही है. लेकिन आरोग्य सेतु एप्प तभी काम करता है जब ब्लूटूथ और लोकेशन ऑन रहे.
हाल ही में, कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी
ने भी ट्वीट कर कहा कि बिना किसी संस्थागत जांच के आरोग्य सेतु ऐप का उपयोग सभी नागरिकों
की गोपनीयता के प्रति चिंता बढ़ाने के बाध्य है.




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